गर्मी के चलते प्यासे वन्यप्राणी रहवासी इलाके में घुसना शुरू कर दिए हैं। दो दिन पहले ही पंडरिया वन परिक्षेत्र के बदौरा में एक भालू पहुंच गया था। भालू ने किसी को नुकसान तो नहीं पहुंचाया, लेकिन वन्यप्राणियों के इस तरह रहवासी क्षेत्र में पहुंचने से खतरा बढ़ने लगा है। दरअसल, कबीरधाम जिले में 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जंगल में तेंदुआ, चीतल, कोटरी समेत 70 से अधिक प्रजाति के वन्यप्राणी हैं।
ये वन्यप्राणी औसतन दो दिन सौंसरों (जंगल में बने कृत्रिम गड्ढे) से 1 लाख लीटर पानी पी जाते हैं। वन विभाग के मुताबिक जंगल में 2 टरबुलेशन टैंक और 15 सौंसर हैं। इनकी क्षमता औसतन 10 हजार लीटर की है। इस तरह 15 सौंसर में 1 लाख 50 हजार लीटर पानी डालते हैं, लेकिन ये सौंसर दो दिन में खाली जाते हैं। यानी इतना पानी वन्यप्राणी पी जाते हैं।
एक टैंकर कवर्धा और दूसरा चिल्फी में है: सौंसर एक तरह का कृत्रिम गड्ढा है, जिसमें गर्मी के दिनों में वन्यप्राणियों के पीने के लिए पानी भरते हैं। अभयारण्य क्षेत्र में 15 सौंसर बने हैं। इसे भरने के लिए 50 हजार लीटर क्षमता वाले दो टैंकर उपलब्ध हैं। इनमें से एक टैंकर कवर्धा और दूसरा चिल्फी में है। भोरमदेव अभयारण्य के रेंजर अंकित पांडेय बताते हैं कि हर तीसरे दिन इन सौंसरों में पानी भरना पड़ता है।
भोरमदेव अभयारण्य क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव विचरण करते देखे जा सकते हैं। वर्ष 2016 में हुए आकलन के मुताबिक अभयारण्य में 70 से अधिक प्रजातियों के वन्यजीव हैं। इसमें तेंदुआ, सांभर, कोटरी, हिरण, मोर, कोयल, खरगोश, हिरण, मैना, तोता, भालू, जंगली सूअर, बायसन सहित अन्य तरह के वन्यजीव निवास करते हैं। वहीं 100 से अधिक प्रजाति के पक्षियां पाई जाती है। इसके अलावा अन्य प्राणी भी हैं।
.jpg)