
शहडोल| विनय मिश्रा बुढ़ार
वैसे तो सोहागपुर क्षेत्र कोयलांचल क्षेत्र के लिए मप्र में प्रसिद्ध है और इसका उदाहरण यहाँ लगे कई खान को देखकर दिया जा सकता है इसी सोहागपुर में अपना एक छोटा सा कस्बा बुढ़ार, धनपुरी हैं जहाँ स्थानीय खानों की ढेर है इससे लगे कई खान हैं जहां से दिन रात सैकड़ों ट्रक कोयला बाहर जाता है
धन,धान्य की ये नगरी कोयले और अन्य खनिज के लिए इस तरह प्रसिद्ध है कि पूरा प्रदेश शहडोल जिले को बुढ़ार के नाम से जानता है
धन,धान्य की ये नगरी कोयले और अन्य खनिज के लिए इस तरह प्रसिद्ध है कि पूरा प्रदेश शहडोल जिले को बुढ़ार के नाम से जानता है
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खैर अब आते हैं मुद्दे पर की आखिर मुझे आज बात पते की है क्यों लिखना पड़ा…????
काले हीरे का यह शहर इस तरह से रोड छाप लोगों को उजला कर रखी है कि उनका काला धूसर चेहरा उन्हें पैसे की चमचमाहट से सर्फ एक्सेल की तरह साफ सुथरा व स्वच्छ रखती है और बड़े बड़े गाड़ियों में उनका काला चेहरा काले फिल्म से ढका होने के कारण उनके वास्तविक चेहरे आभास नही हो पाता जो कभी सड़कों पर छिब्बीयां ढोया करते थे और कोयला चोरी किया करते थे आज वो शहर के नामचीन सेठ और भैया हो गए जिन्हें लोग तरह तरह के सेठ के नाम से जानने लगे हैं फलाना सेठ,फलाना भैया जो दिन भर सफेद उजली गाड़ी से स्वच्छ कपड़े पहनकर अपने काले चेहरे को ढंक उन स्वच्छ अधिकारियों को धौंस दिखाते हैं जो पढाई लिखाई कर प्रशासनिक सेवा में संलग्न है ,बड़ा हास्यपद लगता है कि एक संघ लोकसेवा आयोग और राज्य लोकसेवा आयोग को एक अनपढ़ व्यक्ति जो कल पटरियों पर कोयला चोरी किया करता था आज उस प्रशासनिक व्यक्ति को बोलता है तेरा तबादला करा दूंगा तेरी कीमत क्या है औकात क्या है ??अभी फोन घुमा के तेरी नौकरी खा लूंगा तरह तरह की फिजूल बातें डरा सहमा बाहर से आया अधिकारी उसे भी नए लोग नया माहौल का अंदाजा तो रहता नही या तो वो भी इनकी चोरी में शामिल हो चोर बन जाए या फिर पकड़ ले कही और का रास्ता
बीते दिनों काले हीरे का खेल इस तरह से चर्चित हुआ कि शायद बात प्रदेश तक गूंज गई होगी शायद पहली बार इतिहास के पन्नो में बुढ़ार शहर से किसी राजस्व अमले के व्यक्ति का नाम पन्नो में अंकित होता ऐसा मैं नही शहर में चारो ओर चर्चा है काले हीरे के भारी भरकम गाड़ी पर कलम चलाना भला मजाक है क्या की कोई प्रभारी से लेकर सिपहिया या फिर जिला मुख्यालय तक गाड़ी को छू दे शायद नही पर ऐसा बीते दिनों हो गया
कल पत्रकार महोदय जैसे ही कालेज तिराहा पहुँचे बड़ा हुजूम सा लगा था तरह तरह की बातें हो रही थी तरह तरह की चर्चाएं हो रही थी कि साहेब की कार्यवाही तो धमाकेदार थी बिना किसी डर भय के ही पहली बार कोई साहेब ऐसी दबंगई से लारी को पकड़े और तरह तरह की बातें
पर बात जो हजम न हुआ वो तो वह की सूत्रों ने बताया कि साहेब अंदर से भय व असहज ,असुरक्षित महसूस कर रहे हैं अब किसी बड़े सेठ पर हाँथ डालने से भय तो सबको लगता है लोगों ने कहा साहेब भी कार्यवाही कर परेशान हो गए हैं और पछता रहे हैं कि शायद उन्हें ऐसा नही करना चाहिए था पर साहेब करते भी क्या बात उनके ईगो पर आ गई थी कई बार वाहन चालक को रुकाने पर भी दबंग चालक नही रुका फिर क्या “साहेब बोले तू भला या मै देख लेते हैं किसमे हैं कितना दम, जिसे शहर में रहना है वो कहलाएगा बाजीराव सिंघम”
फिर क्या पहुंच गई गाड़ी सुरक्षा प्रहरियों के पास पर वहां भी शायद कायदों के रखवालों ने अपना दम तोड़ते नजर आए और लग गए चोरो कि दलाली करने मे, आगे और भी है.
फिर आएंगे फिर सुनाएँगे आपको अपने मन की बात पर आप किसी से कहिएगा नही क्योंकि “बात पते की है अपने तक ही रखना”…..
काले हीरे का यह शहर इस तरह से रोड छाप लोगों को उजला कर रखी है कि उनका काला धूसर चेहरा उन्हें पैसे की चमचमाहट से सर्फ एक्सेल की तरह साफ सुथरा व स्वच्छ रखती है और बड़े बड़े गाड़ियों में उनका काला चेहरा काले फिल्म से ढका होने के कारण उनके वास्तविक चेहरे आभास नही हो पाता जो कभी सड़कों पर छिब्बीयां ढोया करते थे और कोयला चोरी किया करते थे आज वो शहर के नामचीन सेठ और भैया हो गए जिन्हें लोग तरह तरह के सेठ के नाम से जानने लगे हैं फलाना सेठ,फलाना भैया जो दिन भर सफेद उजली गाड़ी से स्वच्छ कपड़े पहनकर अपने काले चेहरे को ढंक उन स्वच्छ अधिकारियों को धौंस दिखाते हैं जो पढाई लिखाई कर प्रशासनिक सेवा में संलग्न है ,बड़ा हास्यपद लगता है कि एक संघ लोकसेवा आयोग और राज्य लोकसेवा आयोग को एक अनपढ़ व्यक्ति जो कल पटरियों पर कोयला चोरी किया करता था आज उस प्रशासनिक व्यक्ति को बोलता है तेरा तबादला करा दूंगा तेरी कीमत क्या है औकात क्या है ??अभी फोन घुमा के तेरी नौकरी खा लूंगा तरह तरह की फिजूल बातें डरा सहमा बाहर से आया अधिकारी उसे भी नए लोग नया माहौल का अंदाजा तो रहता नही या तो वो भी इनकी चोरी में शामिल हो चोर बन जाए या फिर पकड़ ले कही और का रास्ता
बीते दिनों काले हीरे का खेल इस तरह से चर्चित हुआ कि शायद बात प्रदेश तक गूंज गई होगी शायद पहली बार इतिहास के पन्नो में बुढ़ार शहर से किसी राजस्व अमले के व्यक्ति का नाम पन्नो में अंकित होता ऐसा मैं नही शहर में चारो ओर चर्चा है काले हीरे के भारी भरकम गाड़ी पर कलम चलाना भला मजाक है क्या की कोई प्रभारी से लेकर सिपहिया या फिर जिला मुख्यालय तक गाड़ी को छू दे शायद नही पर ऐसा बीते दिनों हो गया
कल पत्रकार महोदय जैसे ही कालेज तिराहा पहुँचे बड़ा हुजूम सा लगा था तरह तरह की बातें हो रही थी तरह तरह की चर्चाएं हो रही थी कि साहेब की कार्यवाही तो धमाकेदार थी बिना किसी डर भय के ही पहली बार कोई साहेब ऐसी दबंगई से लारी को पकड़े और तरह तरह की बातें
पर बात जो हजम न हुआ वो तो वह की सूत्रों ने बताया कि साहेब अंदर से भय व असहज ,असुरक्षित महसूस कर रहे हैं अब किसी बड़े सेठ पर हाँथ डालने से भय तो सबको लगता है लोगों ने कहा साहेब भी कार्यवाही कर परेशान हो गए हैं और पछता रहे हैं कि शायद उन्हें ऐसा नही करना चाहिए था पर साहेब करते भी क्या बात उनके ईगो पर आ गई थी कई बार वाहन चालक को रुकाने पर भी दबंग चालक नही रुका फिर क्या “साहेब बोले तू भला या मै देख लेते हैं किसमे हैं कितना दम, जिसे शहर में रहना है वो कहलाएगा बाजीराव सिंघम”
फिर क्या पहुंच गई गाड़ी सुरक्षा प्रहरियों के पास पर वहां भी शायद कायदों के रखवालों ने अपना दम तोड़ते नजर आए और लग गए चोरो कि दलाली करने मे, आगे और भी है.
फिर आएंगे फिर सुनाएँगे आपको अपने मन की बात पर आप किसी से कहिएगा नही क्योंकि “बात पते की है अपने तक ही रखना”…..
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