शहडोल: जिले से महज 30 किमी बसे एक छोटे से गांव लखवरिया जहां पांडव के अज्ञातवास के दौरान कुछ समय गुजरा था. शायद कम ही लोग जानते होगे लखवारिया को जहां के सारे मंदिर जर्जर व अनदेखी का शिकार हुआ है.
एक लाख गुफाओं के कारण नाम पड़ा लखवारिया
अज्ञातवास के दौरान पांडव ने यह एक लाख गुफाओं का निर्माण किया था जो आज ट्रस्ट की अनदेखी का शिकार हो गया है. एक लाख गुफाओं में कुछ ही गुफा शेष बचे है बाकी जमीन के अंदर दब गई है. कुछ साल पहले खुदाई के दौरान एक अनोखी शिवलिंग मिली थी और हर गुफाओं में शिवलिंग है. अगर खुदाई किया जाए तो सामने कई अनोखी शिवलिंग है यहां के बाबा श्री श्री 108 श्री नगासाधु पशुपतिनाथ नंद गिरी महंत लखवरिया ने पब्लिक न्यूज से चर्चा के दौरान बताया कि कई सालो से चली आ रही कावर चढ़ने की प्रथा, अमरकंटक से नर्मदा माँ का जल लेकर पैदल चल कर आते है भक्त लखवरिया धाम.
हर साल की तरह इस साल भी अमरकंटक से नर्मदा नदी का जल लेकर पैदल 1000 से अधिक लोग यहां आये हैं. यहां सावन मास में सोमवार को पहुंचते है और हर सोमवार को विशाल भंडारा का आयोजन किया जाता है.
बात जब ट्रस्ट की हो तो उनकी बात ही निराली है. ना तो मंदिर में व्यवस्था का आलम है और न ही कांवरियों के लिए कोई व्यवस्था की जाती है.
देखा जाए तो मंदिर स्थल पर बसंतपंचमी को लगने वाले 3 दिवसीय विशाल मेला में ट्रस्ट द्वारा ही मेला वसूली किया जाता है. फिर मंदिर के सुदृढ़ीकरण में ट्रस्ट द्वारा खर्च क्यों नही किया जाता यह एक बड़ा प्रश्न है.
![]() |
| महंत पशुपतिनाथ |





.jpg)